अच्छा लगेगा मुझे बताकर प्यारा लगे शायद आप को जानकार ...



Dec 20, 2009

आइये हजारीबाग घूमते हैं

ये नज़ारे यहाँ आम हैं प्रकृति की अनोखी छटा हर ज़गह आपको दिखेगी .ग्लोबल वार्मिंग का असर यहाँ भी है इस कारन व अतावरण में तपिस थोड़ी बढ़ी है बोटम का शहर हजारीबाग वैसा तो नहीं रहा जैसा इसके नाम के सब्दार्थ हैं .हजारीबाग यानि हज़ार बागो का शहर ,

यहाँ सभ्यता पाषाण कालीन रही है और इसके सबूत हैं ये equinox पॉइंट जहाँ से आदिकाल में मानव यहाँ काल की गणना करता था ,ऐसे न जाने कितने ही धरोहर यहाँ संजोये गए हैं और लोगो की राह देख रहे हैं दो कारण से पहला तो इन्हें देख लोगो का भला हो और दूसरा जब लोग यहाँ आयेंगे तो सायद सरकार की निगाह इनपे पड़े और इनका भला हो जाये ,आखिर कबतक अपने बेनूरी पे ये आंसू बहेगी

9 comments:

मनोज कुमार said...

अच्छी रचना बधाई। ब्लॉग जगत में स्वागत।

straight forward said...

mere bachpan ka kuch waqt hazaribagh me bita hai. main tab kareeb 4-5 saalon ki thi. main kareeb 1990 ke aas-paas waha thi, mujhe jitna yaad hai hazaribagh ki greenary mujhe hamesha lubhati thi. khali lambe maidaan, dur dur tak koi ghar nahi, toot ke ped, abrak se chamakte raste, rang birange phoolon wali jhadiyaan..
mai 92 me waha se patna ki bheed me aa gayi, uske baad kabhi jane ka mouka nahi mila..
par ek baar wapas jana chahti hun,, pata nahi kitna kuch badal gaya hoga..

shama said...

Sundar chitron ke saath sundar rachana..swagat hai!

kshama said...

Waah!
Swagat hai!

Krishna Kumar Mishra said...

सुन्दर ख़याल

अजय कुमार said...

हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी टिप्पणियां दें

कृपया वर्ड-वेरिफिकेशन हटा लीजिये
वर्ड वेरीफिकेशन हटाने के लिए:
डैशबोर्ड>सेटिंग्स>कमेन्टस>Show word verification for comments?>
इसमें ’नो’ का विकल्प चुन लें..बस हो गया..कितना सरल है न हटाना
और उतना ही मुश्किल-इसे भरना!! यकीन मानिये

dweepanter said...

बहुत ही सुंदर रचना है। ब्लाग जगत में द्वीपांतर परिवार आपका स्वागत करता है।
pls visit...
www.dweepanter.blogspot.com

शशांक शुक्ला said...

अच्छी जानकारी दी है

Bismay Alankar said...

aapne jo utsahvardhan kiya hai iske liye koti koti dhanyavad ,yakin maniye dara huaa tha ki pryas vivechna na lage aapne saraha iskeliye dil se sukriya.....