अच्छा लगेगा मुझे बताकर प्यारा लगे शायद आप को जानकार ...



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Aug 3, 2010

आत्महत्या कि नगरी हजारीबाग

हजारीबाग कि कहानी निराली है प्रकृति ने खूब नेमते बरसाई ,जंगल झाड ,नदी ,झरने, झील  और अच्छी  आबो हवा लेकिन ना जाने किसकी नज़र लग गयी ,लोग बात बात पर अपनी जान लेने लगे ,सल्फास कि गोलियां ,फासी के फंदे ,कुँए में लाश रोज अखबारों कि सुर्खियाँ बनने लगे ,मरने वालो कि उम्र का औसत १६ से ३० ,रोजाना 6 से ७  लोग यहाँ आत्महत्या का प्रयास करते हैं जिनमे औसतन ४ से ५ लोगो कि मौत हो जाती है  , 
                                                                                                                                         यहाँ सबसे ज्यादा मौत सल्फास कि गोली खाने से होती है , चुकी पूरा क्षेत्र किसानबाहूल है और लोग किटनाशक के रूप में सल्फास कि गोली का प्रयोग करते हैं यही वजह है कि घरो में सल्फास कि गोलिया आसानी से मिल जाती है और लोग इसे खाकर अपनी जान दे देते हैं ,चौकाने वाले तथ्य यह है कि इस सल्फास पर सरकार एक दशक पहले ही प्रतिबन्ध लगा चुकी है लेकिन हजारीबाग ही नहीं पुरे राज्य में ये बीज बेचने वालो के पास आसानी से मिल जाता है -
                                                                                                                                                          इस साल  हजारीबाग में आत्महत्या के प्रयास और मरने वालो के आंकड़े को अगर देखे तो यह हैरान करती है जनवरी माह में ६५ लोगो ने आत्महत्या का प्रयास किया जिसमे 2६ पुरुष और ३५ महिलायों कि जान गयी इसी तरह फ़रवरी में ६० लोग कि मौत  हुई,मार्च में 66 लोग ने जान दी ,अप्रैल में ५५ ,जून में ७२ और जुलाई में अब तक ६५ लोग जान दे चुके हैं ,चौकिये नहीं ये आंकड़े केवल सदर अस्पताल और हजारीबाग के आस पास के अस्पतालों से लिए गए हैं जो मामले प्रकाश में आये हैं ,कितनी खबरे तो पहुचती ही नहीं -

हजारीबाग का यह इचाक प्रखंड है यह कभी रामगढ राजा कि राजधानी हुआ करती थी , छोटे से गाँव में १०१ मंदिर १०१ तालाब और १०१ बगीचे होने के कारण लोग इसे छोटी अयोध्या  भी कहते थे,आज जिले में होनी वाली आत्महत्या  कि सबसे ज्यादा घटना इसी प्रखंड में होती है हमने इसके कारण जान्ने का प्रयास किया -
                                                                                                                                         अगर हम यहाँ के सामाजिक कारणों को जानने  का प्रयास किया कि क्यों यहाँ महिलाये या लड़कियां आत्महत्या  करती हैं,जो तथ्य निकल कर आये वो चौकौने वाले हैं ,समाज में अनैतिक संबंधो या उन संबंधो के उजागर हो जाने से जो प्रताड़ना मिलती है सबसे ज्यादा आत्महत्या के कारणों में वही रहता है इचाक जैसे प्रखंडो में जागरूकता फ़ैलाने कि ज़रूरत है और समाज के सभी वर्गों से इस ओर कदम उठाने कि ज़रूरत है कि क्यों इचाक आज आत्महत्या कि नगरी बनती जा रही है स्त्रियों कि इज्ज़त और उनका सम्मान करने से ही कोई समाज आगे बढ़ता है -